

नैनीताल जनपद में निजी स्कूलों द्वारा विभिन्न मदों में की जा रही अवैध वसूली और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) गोविन्द राम जायसवाल ने जिले के सभी निजी स्कूलों के लिए शुल्क निर्धारण और वसूली के संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन के इस बड़े फैसले से जिले के हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

प्रमुख बिंदु: आदेश की बड़ी बातें
3 साल में सिर्फ 10% फीस बढ़ोतरी: स्कूल अब 3 साल की अवधि में अधिकतम 10 प्रतिशत ही फीस बढ़ा सकेंगे, जिसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) की मंजूरी अनिवार्य होगी।
अतिरिक्त फीस होगी वापस: शैक्षणिक सत्र 2026-27 में वसूली गई एक्स्ट्रा फीस को 1 जुलाई 2026 की ट्यूशन फीस में एडजस्ट (समायोजित) किया जाएगा। इसका प्रामाणिक विवरण 7 दिनों के भीतर शिक्षा विभाग को देना होगा।
परीक्षा और TC फीस की सीमा तय: उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क अधिकतम ₹600 और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) का शुल्क मात्र ₹1 निर्धारित किया गया है।

फीस के लिए दबाव नहीं: अभिभावकों को मासिक, त्रैमासिक या छमाही फीस देने का विकल्प मिलेगा। कोई भी स्कूल एकमुश्त (एक साथ) फीस जमा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
नियम तोड़ने पर ₹5 लाख तक का जुर्माना और रद्द होगी मान्यता
मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी:
RTE एक्ट के तहत: ₹1 लाख का आर्थिक दंड।
CBSE बायलॉज के तहत: ₹5 लाख का जुर्माना।
कठोर कार्रवाई: नियमों की अनदेखी पर स्कूल की मान्यता और NOC को तत्काल निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
”शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजी स्कूलों की शुल्क व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया गया है।”
– ललित मोहन रयाल, जिलाधिकारी (नैनीताल)
