सतत विकास के लिए जनभागीदारी अनिवार्य, उत्तराखंड की वन पंचायतें दुनिया के लिए मिसाल ओम बिरला
सामूहिक प्रयासों का आह्वान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नैनीताल में सतत विकास और पारिस्थितिक संतुलन के लिए सरकारी संस्थाओं, पंचायतों और नागरिकों की संयुक्त भागीदारी पर जोर दिया।
वन पंचायतों की सराहना उन्होंने उत्तराखंड की वन पंचायतों को “भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे सशक्त कड़ी” बताया और कहा कि यह सामुदायिक प्रबंधन का एक सफल वैश्विक मॉडल है।
जलवायु परिवर्तन से जंग बिरला ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से लड़ने के लिए ‘पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली’ (LiFE) और स्थानीय समुदायों का पारंपरिक ज्ञान सबसे प्रभावी हथियार है।
जमीनी लोकतंत्र का सम्मान प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि यहाँ की पंचायतों का अनुभव दिल्ली की पंचायत (संसद) से कम नहीं है।
पारंपरिक ज्ञान और आयुर्वेद: उन्होंने औषधीय पौधों के संरक्षण, उनके वैल्यू एडिशन और शोध पर बल दिया ताकि उत्तराखंड के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ा जा सके।
महिलाओं की भूमिका: लोकसभा अध्यक्ष ने वन संरक्षण और सामुदायिक विकास में उत्तराखंड की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की विशेष रूप से प्रशंसा की।
समस्याओं का समाधान संवाद के दौरान प्रतिनिधियों ने वनाग्नि (Forest Fire) की रोकथाम और पंचायतों के वित्तीय सुदृढ़ीकरण के सुझाव रखे, जिन्हें श्री बिरला ने केंद्र स्तर तक ले जाने का आश्वासन दिया।
”जल, जंगल और जमीन का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारा सामूहिक उत्तरदायित्व है।” ओम बिरला
