
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय के 20वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की

और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल और उपाधियां प्रदान कीं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा न केवल आत्मनिर्भर बनाती है, बल्कि विनम्र होना और समाज व देश के विकास में योगदान देना भी सिखाती है।शिक्षा का उद्देश्य: शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की बुद्धि और कौशल का विकास करना ही नहीं, बल्कि उनके नैतिक बल और चरित्र को भी सुदृढ़ करना होना चाहिए।: शिक्षा हमें आत्मनिर्भर बनाती है और समाज व देश के विकास में योगदान देना सिखाती है।
शोध और नवाचार देश में शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण हिमालय की जीवनदायिनी संपदाओं का संरक्षण और संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है-युवाओं की भूमिका*: वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में कुमाऊँ विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के युवा विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बुद्धि का विकास नहीं, बल्कि चरित्र का निर्माण भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे आस-पास के गाँवों में जाएँ और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए हर संभव प्रयास करें।
