नैनीताल में आर्ट ऑफ लिविंग के हैप्पीनेस वुमेन्स कलेक्टिव समूह द्वारा रंगवाली पिछोड़ा कार्यशाला का आयोजन किया गया

नैनीताल में आर्ट ऑफ लिविंग के हैप्पीनेस वुमेन्स कलेक्टिव समूह द्वारा रंगवाली पिछोड़ा कार्यशाला का आयोजन किया गया


‎आर्ट ऑफ लिविंग के हैप्पीनेस वुमेन्स कलेक्टिव समूह ने उत्तराखंड की पारंपरिक कला ‘रंगवाली पिछोड़ा’ के संरक्षण और उसके कौशल को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला गोवर्धन हॉल समीप नैना मंदिर में आयोजित की गई, जिसमें 7 सरकारी विद्यालयों के 110 बच्चों ने भाग लिया।

‎रंगवाली पिछोड़ा की पारंपरिक कला को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुँचाना।  गोवर्धन हॉल समीप नैना मंदिर में आयोजित, जहां प्रशिक्षक ज्योति साह और उनकी सहायिका भगवती सुयाल ने पिछोड़ा निर्माण की पारंपरिक तकनीकें सिखाईं।7 सरकारी विद्यालयों के 110 बच्चों ने भाग लिया, जिन्हें इस कला को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में उपयोग में लाने और पिछोड़ा के सही उपयोग पर मार्गदर्शन किया गया।

‎विशेष अतिथि ईशा साह और श्रीमती अंजू जगाती ने रंगवाली पिछोड़ा का इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और दुरुपयोग ना करने की सलाह दी।
‎पुरस्कार वितरण प्रतिभागी विद्यालयों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

‎रंगवाली पिछोड़ा की विशेषता
‎- कुमाऊँ क्षेत्र की महिलाओं द्वारा विवाह जैसे शुभ अवसरों पर पहनी जाने वाली पारंपरिक ओढ़नी।
‎- विशिष्ट डिज़ाइन, लाल-पीले रंगों और धार्मिक प्रतीकों के कारण विशिष्ट पहचान रखती है।

‎इस दौरान रेशमा टंडन  कविता गंगोला सुनीता वर्मा
‎प्रेमलता  संगीता शाह सिम्मी अरोरा सोनी अरोरा
‎मंजू नेगी मंजू बिष्ट किरण टंडन बीना शर्मा
‎कविता जोशी शिखा साह वैशाली बिष्ट संध्या तिवारी
‎मधु बिष्ट ममता गंगोला पूजा शाही ज्योति मेहरा  पूजा मल्होत्रा श्वेता अरोरा वंदना मेहरा कामना कंबोज उमा कांडपाल निम्मी कीर विमला कफ़लटीया नेहा डालाकोटी
‎सोमा शाह  आदि।

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