कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में पर्यावरण संवर्धन एवं संरक्षण के लोक पर्व हरेले तथा एक पेड़ मां के नाम के अवसर पर पौधरोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन इग्नू, एलुमनी सेल, विजिटिंग प्रोफेसर और वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
पौधरोपण कार्यक्रम के मुख्य बिंदु
- पौधों का चयन: इस कार्यक्रम में पदम, गुड़हल, किम्मू और चिनार के पौधों का रोपण किया गया। पदम एक धार्मिक पौधा है, जबकि चिनार अपने औषधीय गुणों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। किम्मू का फल शहतूत के रूप में जाना जाता है, जो खाने योग्य होता है, और गुड़हल एक गार्डन पौधा है जो अपने सुंदर फूलों के लिए प्रसिद्ध है।
पर्यावरण का महत्व हरेले पर पौधरोपण प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, समर्पण और प्रकृति के प्रति धन्यवाद के साथ धरती माता को प्रणाम करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
हरेले और एक पेड़ मां के नाम के अवसर पर आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम ने न केवल पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को भी दर्शाया। इस प्रकार के आयोजनों से हम अपने आसपास के वातावरण को बेहतर बना सकते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुंदर पर्यावरण का निर्माण कर सकते हैं
इस दौरान प्रॉफ ललित तिवारी (विभागाध्यक्ष)
डॉ नवीन पांडे नंदा बल्लभ पालीवाल (कर्मचारी संघ के अध्यक्ष)
सूरज गोपाल बिष्ट कुंदन इग्नू के विद्यार्थी आदि।
