उत्तराखण्ड के लोक साहित्य को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने की पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि उत्तराखण्ड की बोलियों, लोक कथाओं, लोकगीतों और साहित्य को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित किया जाए। इसके लिए ई-लाइब्रेरी बनाई जाएगी और लोक कथाओं पर आधारित ऑडियो-विजुअल सामग्री तैयार की जाएगी।

मुख्य बिंदु:

  • डिजिटल संरक्षण: उत्तराखण्ड की बोलियों, लोक कथाओं, लोकगीतों और साहित्य का डिजिटलीकरण।
  • ई-लाइब्रेरी: लोक साहित्य को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए ई-लाइब्रेरी का निर्माण।
  • भाषाई मानचित्र: उत्तराखण्ड की बोलियों का एक भाषाई मानचित्र बनाने की योजना।
  • साहित्य गौरव सम्मान: साहित्य गौरव सम्मान की राशि बढ़ाकर 5 लाख 51 हजार रुपये की जाएगी।
  • दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान: दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान के लिए 5 लाख रुपये की राशि निर्धारित।
  • बुक के बदले बुके: भेंट स्वरूप बुके के बदले बुक का प्रचलन शुरू करने पर जोर।

आगे की कार्रवाई:

  • स्कूलों में स्थानीय बोली पर प्रतियोगिताएं: स्कूलों में सप्ताह में एक बार स्थानीय बोली पर भाषण, निबंध और अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन।
  • साहित्य महोत्सव: उत्तराखण्ड भाषा और साहित्य का बड़े स्तर पर महोत्सव आयोजित करने की योजना।
  • सचल पुस्तकालय: राज्य के दूरस्थ स्थानों तक सचल पुस्तकालयों की व्यवस्था कराने की योजना।

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