
आशा फाउंडेशन की मुहिम: डी.एस.बी. परिसर में छात्राओं को माहवारी स्वच्छता व कैंसर के प्रति किया जागरूक, कॉलेज में लगाया गया सैनिटरी पैड इंसीनरेटर
नैनीताल।
महिलाओं और बालिकाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाने और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ आशा फाउंडेशन की मुहिम लगातार जारी है। इसी क्रम में आज आशा फाउंडेशन द्वारा डी.एस.बी. परिसर (कुमाऊं विश्वविद्यालय) में ‘माता जिया रानी महिला अध्ययन केंद्र’ एवं ‘आंतरिक शिकायत समिति’ के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डी.एस.बी. परिसर की निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा के विशेष आग्रह पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को माहवारी के समय होने वाली समस्याओं, स्वच्छता प्रबंधन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूक करना था।

युवाओं की भागीदारी से ही सफल होगी मुहिम: आशा शर्मा
कार्यक्रम में विचार व्यक्त करते हुए आशा फाउंडेशन की अध्यक्ष आशा शर्मा ने कहा कि किसी भी सामाजिक मुहिम का उद्देश्य युवाओं की भागीदारी के बिना अधूरा है। आज के दौर में कैंसर जैसी बीमारियां युवाओं में भी देखने को मिल रही हैं, इसलिए उन्हें जागरूक करना बेहद जरूरी है। जागरूकता के अभाव में लोग स्तन कैंसर और बच्चेदानी के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में आ जाते हैं। हमारे समाज में आज भी इन विषयों पर खुलकर बात नहीं होती है, जबकि छात्राओं को इस पर खुलकर बात करने की आवश्यकता है ताकि वे स्वस्थ रहकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
पर्यावरण और सेहत के लिए बाजारू पैड्स नुकसानदेह
अध्यक्ष आशा शर्मा ने बाजार में मिलने वाले रासायनिक सैनिटरी पैड्स के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए बताया कि इन्हें कचरे में फेंकने से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है, क्योंकि इनके नष्ट होने की समय-सीमा अनिश्चित है। इस समस्या के समाधान के लिए फाउंडेशन द्वारा आज कॉलेज परिसर में इस्तेमाल किए गए पैड्स को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने हेतु इंसीनरेटर (Incinerator) मशीन लगाई गई।
इसके साथ ही, फाउंडेशन द्वारा छात्राओं को ‘रीयूजेबल कपड़े के पैड्स’ के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया। ये पैड्स पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिन्हें धोकर और धूप में सुखाकर लगभग 2 से ढाई साल तक आसानी से उपयोग किया जा सकता है। इससे न सिर्फ बाजारू पैड्स पर होने वाला हर महीने का खर्च बचेगा, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
100 छात्राओं को बांटे गए रीयूजेबल पैड्स
इस मौके पर कॉलेज की 100 बालिकाओं को फाउंडेशन की ओर से रीयूजेबल सैनिटरी पैड्स किट मुफ्त वितरित किए गए। पैड्स पाकर छात्राओं के चेहरों पर मुस्कान तैर गई। छात्राओं ने खुशी जताते हुए कहा कि कॉलेज परिसर में पहली बार इस विषय पर इतनी खुलकर और सार्थक बातचीत हुई है, जिससे उनकी कई भ्रांतियां दूर हुईं।
अब तक 45 गांवों में पहुंच चुकी है मुहिम
आशा फाउंडेशन के सचिव निश्चल शर्मा ने बताया कि संस्था अब तक उत्तराखंड के लगभग 45 गांवों में इस स्वास्थ्य और स्वच्छता मुहिम को पहुंचा चुकी है, जिसके तहत अब तक 6,500 से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक किया जा चुका है।
शॉल ओढ़ाकर किया गया सम्मान
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर डी.एस.बी. परिसर की निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा और उपस्थित अन्य प्राध्यापकों ने आशा शर्मा को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। अंत में आशा शर्मा ने निदेशक और सभी विभागों के प्रोफेसरों का आभार व्यक्त किया।
ये रहे उपस्थित:
कार्यक्रम में फाउंडेशन की ओर से फाउंडर मेंबर नीलू एल्हंस, बच्ची सिंह नेगी और सचिव निश्चल शर्मा उपस्थित रहे। वहीं कॉलेज प्रशासन की तरफ से निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा, प्रो. चंद्रकला रावत, प्रो. किरण पंत सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक और भारी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।
