
मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सप्तऋषि अखाड़ा परिषद के संत समागम सम्मेलन में उत्तराखण्ड देवभूमि जागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी हेमन्त भट्ट जी को महामण्डलेश्वर की पदवी प्रदान की गई। परिषद के संस्थापक श्री सच्चिदानंद बालप्रभु जी महाराज, जगदगुरु श्री अवधेश प्रपन्नाचार्य जी और अध्यक्ष ऋषि हर मनोज दास गुरुजी की उपस्थिति में यह विशेष समारोह सम्पन्न हुआ।
नई जिम्मेदारियां
हेमन्त भट्ट जी को अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें सनातन धर्म की रक्षा, अखाड़े की संगठनात्मक मजबूती और संत परंपरा की गरिमा को बनाए रखना शामिल है।
ऋषिवर कृष्ण चन्द्र काण्डपाल जी को अंतर्राष्ट्रीय सप्तऋषि अखाड़ा परिषद का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया है, जो चारों धामों और देवभूमि के प्रमुख मंदिरों के संतों और पुजारियों को अखाड़ा परिषद से जोड़ने का कार्य करेंगे.
महामण्डलेश्वर की घोषणा
महामण्डलेश्वर कैलाशानंद महाराज जी ने शीघ्र ही निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्यों को प्रारम्भ करने की घोषणा की ¹:
गुरुकुल स्थापना गौशालाओं का निर्माणधर्मशास्त्र और शस्त्र शिक्षा का प्रसार संस्कृत गुरुकुलों की स्थापना नशामुक्ति और धर्मांतरण रोकने के कार्य
अखाड़ा परिषद हिंदू धर्म के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसकी स्थापना 1825 में हरिद्वार में हुई थी और यह भारत के 13 प्रमुख अखाड़ों के बीच समन्वय स्थापित कर धार्मिक आयोजनों का संचालन करता है
